मिथुन ( Gemini )

ज्योतिष चक्र की यह तृतीय राशि है, जो 60° से 90° के बीच स्थित रहती है। यह राशि वायु गुण की प्रधान, द्विस्वभाव तथा पुरुष चरित्र – पूर्ण है। इस राशि का स्वामी बुध है। अन्य कोई ग्रह इस राशि में स्थित होने पर उच्च या नीच का प्रभाव नहीं रखता है। बृहस्पति के लिए यह सम स्थान है, शनि व शुक्र के लिए मित्र स्थान तथा सूर्य, चंद्र व मगल के लिए यह शत्रु स्थान है, गदा लिये हुए पुरुष व वीणा ली हुई स्त्री की जोडी इस राशि का चिह्न है। मृगशिरा नक्षत्र के तृतीय व चतुर्थ चरण, आर्द्रा नक्षत्र के चारों चरण तथा पुनर्वसु नक्षत्र के प्रथम, द्वितीय व तृतीय चरण मिथुन राशि मे पडते है। ऊँचा व सीधा कद, लंबे हाथ तथा उभरी हुई नसे, पैरो का गठन अपेक्षाकृत कम मोटाईवाला। आँखो मे हलका लाल या भूरा रंग।

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गेहुँआ रग। नजर तीखी व नाक बडी। मनोवृत्ति : निष्कपट, सरल व हाजिरजवाब। लेखन व अध्ययन के प्रति अभिरुचि। कभी-कभी अस्थिर चित्त, स्थिरता व धैर्य की कमी। सामान्य चरित्र सक्रिय तथा गणित, यात्रिकी, वैज्ञानिक विषयो के अध्ययन के प्रति अभिरुचि।

प्रबंधक के कार्य को कुशलता से करने में कठिनाई आएगा यात्रा करने की इच्छा रहेगी द्विस्वभाव के कारण यह व्यक्ति एक समय मे एक से अधिक कार्य करने की प्रवृत्ति रखता है तथा नई परिस्थितियो मे आसानी से अपना स्थान बना लेते हैं। सामान्यत आवाज अच्छी व तेज होगी गायन में भी रुचि होगी। राशि का स्वामी बुध होने के कारण बौद्धिक विषयो मे विशेष रुचि किसी भी नए विचार को स्वीकार करने में तत्पर। किसी कार्य को करते समय परिणाम की प्रतीक्षा के लिए धैर्य का अभाव रहता है तथा शीघ्र परिणाम जानने की उत्सुकता रहती है, जिसके कारण कार्य का सही प्रकार से किया जाना

प्रभावित होता है। धैर्य का अभाव तथा अनावश्यक चिंता मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा तथा इससे संबधित रोग की आशका रहेगी, परतु यदि मानसिक तनाव पर नियंत्रण रखे तो स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। बीमारी की दशा मे सर्दी, जुकाम, फेफडे के रोग होने की सभावना अधिक रहेगी।

 

शीर्षोदयी नृमिथुनं सगदं च सवीणकम्।

प्रत्यङ्मरुद् द्विपाद्रात्रिबली ग्रामवजोऽनिली॥

समगात्रो हरिद्वर्णो मिथुनाख्यो बुधाधिपः। बृहत्‍पाराशरहोराशास्‍त्र

मिथुन का स्वरूप गदा-वीणा सहित, पुरुष-स्त्री की जोड़ी, शीर्ष से उदय, पश्चिम दिशा में निवास, वायुतत्त्व, दो पैर, रात्रि में बल, ग्रामों में विचरण, वात प्रकृति, समान शरीर, हरित वर्ण, तथा स्वामी बुध होते हैं॥