कन्या ( Virgo)

यह ज्योतिष चक्र की पांचवीं राशि है, जो 120° से 150° के बीच स्थित है। यह अग्नि, अचर व पुरुष चरित्र से युक्त है। इस राशि का स्वामी सूर्य है। अन्य कोई ग्रह इस राशि में उच्च या नीच का नही होता है। सिंह राशि चंद्र, मंगल व बृहस्पति के लिए मित्र स्थान है तथा बुध, शुक्र व शनि के लिए शत्रु स्थान है। मघा व पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्रों के चारो चरण तथा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम चरण सिंह राशि के अंतर्गत पड़ता है। इस राशि का चिह्न भी इसके नाम के अनुसार सिंह है शारीरिक गठन: आकर्षक शरीर मजबूत हड्डी, चौडे कंधे, औसत ऊँचाई, शरीर के ऊपरी भाग का गठन अधिक आकर्षक। गेहुँआ रंग सामान्यत इनका शरीर चुस्त रहता है।

Home Vastu Checked
0 k+
Consultations Given
0 k+
Kundlis Served
0 +
Years of Exp
0 +

भावुक, संवेदनशील तथा अध्ययन की प्रवृत्ति। आत्मविश्वास की कमी। सक्रिय मस्तिष्क, किसी कार्य को करने के लिए निर्धारित तरीके से करने की प्रवृत्ति, धैर्यशील, कला, साहित्य या संगीत के प्रति लगाव। सामान्य चरित्र अपनी बात संक्षेप में कहने की तथा दूसरों से भी सक्षेप में उनकी बात सुनने की प्रवृत्ति। किसी समस्या को गहराई से सोचकर व्यावहारिक तरीके से कार्य करेगे। अन्य व्यक्ति की गलती को शीघ्र पकड़ सकते है। अत ये व्यक्ति ऑडिटर के रूप में विशेष रूप से सफल होते हैं। बचपन से ही कन्या लग्न के बच्चे की प्रतिभा सामने आ जाती है। सतर्कता से कार्य करनेवाला। मुसीबत के समय के लिए धन बचाकर रखनेवाला। अत ऐसे व्यक्ति को कभी अचानक आर्थिक सकट का सामना नही करना पडता है। अपने कार्यालय या व्यवसाय सबंधी कागजात व्यवस्थित रूप से रखेंगे। विज्ञान व गणित सबधी विषयों मे विशेष रुचि। साथ ही कला, साहित्य व संगीत के प्रति प्रेम। ऐसे व्यक्ति के लिए अध्ययन का विषय विज्ञान या गणित उचित होगा। रुचि के रूप में कला व सगीत के लिए कुछ समय दे सकते हैं। ये व्यक्ति दूसरों की प्रतिभा से शीघ्र प्रभावित हो जाते हैं परंतु अपने निजी निर्णय स्वविवेक से लेते हैं कन्या लग्न के व्यक्तियों की पाचन शक्ति अच्छी नहीं होती है और लीवर कमजोर रहता है।

 

पार्वतीयाथ कन्याख्या राशिर्दिनबलान्विता।

शीर्षोदया च मध्याङ्गा द्विपाद्याम्यचरा  सा  

सा सस्यदहना वैश्या चित्रवर्णा प्रभञ्जिनी।

कुमारी तमसा युक्ता बालभावा बुधाधिपा ॥ बृहत्‍पाराशरहोराशास्‍त्र

कन्या राशि का पर्वतीय प्रदेशों में विचरण, दिन में बल, शीर्ष से उदय, मध्यम शरीर, दो पैर, दक्षिण दिशा में निवास, सस्य सहित अग्नि का हाथ में धारण, वैश्यजाति, चित्रवर्ण, वायुतत्व, कुमार अवस्था, तमोगुण तथा स्वामी बुध होते हैं॥