कर्क ( Cancer )

ज्योतिष चक्र की यह चतुर्थ राशि है, जो 90° से 120° के बीच स्थित होती है। इसका स्वभाव चर, जल व नारी चरित्रवाला होता है। यह मूक राशि है। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा होता है। इस राशि मे स्थित होने पर बृहस्पति उच्च का प्रभाव रखता है, परतु मंगल नीच का प्रभाव रखता है। सूर्य के लिए यह राशि मित्र स्थान है तथा बुध, शुक्र व शनि के लिए शत्रु स्थान है। पुनर्वसु नक्षत्र का अतिम चरण व पुष्य तथा आश्लेषा नक्षत्र के चारो चरण इस राशि के अतर्गत आते हैं। इस राशि का चिह्न ‘केकडा’ है। मध्यम ऊँचाई, भरा हुआ चेहरा, आयु बढने के साथ-साथ तोद निकलने की सभावना। शरीर का ऊपरी भाग भारी व गढ़ा हुआ, परतु हाथ-पैर अपेक्षाकृत पतले। रंग गोरा, सीना चौडा। मनोवृत्ति अति सवेदनशील अन्वेषणशील धैर्य की कमी सगीत प्रेमी कल्पनाशील। मानसिकता मे समय-समय पर परिवर्तन, क्षणिक क्रोध आना। कभी अति साहसी, कभी साहस का अभाव। बुद्धिमान, मितव्ययी, परिश्रमी, मस्तिष्क मे सहज बोधशक्ति व किसी परिस्थिति को गहराई से समझने की क्षमता होगी। आमोद-प्रमोद व संगीत के प्रति रुचि।

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अपने परिजनो के प्रति विशेष लगाव व आत्मविश्वास। यह बातूनी, ईमानदार व अपनी बात पर दृढ़ होता है। जल-प्रधान होने के कारण कर्क राशि के व्यक्ति को आसानी से प्रभावित किया जा सकता है। यह व्यक्ति किसी भी परिस्थिति के अनुकूल अपने को ढालने की शक्ति रखता है। यह व्यक्ति कर्तव्यपरायण होता है तथा इसमे उत्तरदायित्व की भावना होती है। पुरानी घटनाओं को याद रखने की तथा बातचीत में इन घटनाओ को दोहराने की आदत इस आदमी में होती है। प्यार व न्यायपूर्ण व्यवहार व अतिथि – सत्कार इसके चरित्र की विशेषता है। इस व्यक्ति का स्वास्थ्य बचपन व यौवनकाल मे अच्छा नही रहता है। सॉस व पाचनतंत्र के रोग के प्रति इसे सतर्क रहने की आवश्यकता है। अच्छे भोजन की ओर विशेष लगाव भी पाचन संबंधी रोग को दे सकता है।

पाटलो वनचारी च ब्राह्मणो निशि वीर्यवान्॥

बहुपादी स्थूलतनुस्तथा सच्चगुणी जली

पृष्ठोदयी कर्कराशिर्मृगाङ्काधिपतिः स्मृतः॥ बृहत्‍पाराशरहोराशास्‍त्र

कर्क राशि का पाटल वर्ण, वन में विचरण, ब्राह्मण जाति, रात्रि में बल, अनेक पैर, मोटा शरीर, सत्व गुण, जलतत्व, पृष्ठ से उदय, तथा स्वामी चन्द्रमा होते हैं ॥