सिंह ( Leo )

यह ज्योतिष चक्र की पांचवीं राशि है, जो 120° से 150° के बीच स्थित है। यह अग्नि, अचर व पुरुष चरित्र से युक्त है। इस राशि का स्वामी सूर्य है। अन्य कोई ग्रह इस राशि में उच्च या नीच का नही होता है। सिंह राशि चंद्र, मंगल व बृहस्पति के लिए मित्र स्थान है तथा बुध, शुक्र व शनि के लिए शत्रु स्थान है। मघा व पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्रों के चारो चरण तथा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम चरण सिंह राशि के अंतर्गत पड़ता है। इस राशि का चिह्न भी इसके नाम के अनुसार सिंह है शारीरिक गठन: आकर्षक शरीर मजबूत हड्डी, चौडे कंधे, औसत ऊँचाई, शरीर के ऊपरी भाग का गठन अधिक आकर्षक। गेहुँआ रंग सामान्यत इनका शरीर चुस्त रहता है।

साहित्य, कला या संगीत के प्रति लगाव, महत्त्वाकाक्षी तथा गर्मजोशी । प्रसन्नचित्त, सहृदय व स्थिर चित्त स्वभाव। सामान्य चरित्र सिह के समान अन्य उपस्थित व्यक्तियों के बीच अपनी उपस्थिति को अनुभव कराने की इच्छा व महत्त्वाकाक्षा। दूसरो की कठिनाई मे उन्हें सहायता देने की तथा अपनी मित्र – मडली रखने की प्रवृत्ति। आत्मविश्वास, विश्वासपात्र तथा परिस्थिति को अपने अनुकूल बनाने की क्षमता। सदैव अध्ययन की प्रवृत्ति। क्षमाशीलता तथा दूसरो की गलतियो को भी भुला देने वाला। सरल, न्यायपूर्ण व खुला व्यक्तित्व कठिनाई के क्षणो मे इसकी कार्यक्षमता विशेष रूप से सामने आती है। कला-साहित्य व संगीत के प्रति विशेष लगाव। दूसरों के विचार व सुझाव की ओर ध्यान न देने की प्रवृत्ति, जिसके कारण इन व्यक्तियो के संबंध अपने वरिष्ठ सहयोगियों व अधिकारियो से मधुर नही रहते है। इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है।
सिंहः सूर्याधिपः सच्ची चतुष्पात् क्षत्रियो वनी।
शीर्षोदयी वृहद्गात्रः पाण्डुः पूर्वेड् द्यवीर्यवान् ॥ बृहत्पाराशरहोराशास्त्र
सिंह राशि का अधिप सूर्य, सत्वगुण, चार पैर, क्षत्रियवर्ण, जंगल में विचरण, शीर्ष से उदय, बड़ा शरीर, पाण्डुवर्ण, पूर्वदिशा में निवास, तथा दिन में बल होता है॥
