वृषभ ( Taurus )

ज्योतिष चक्र की यह द्वितीय राशि है, जो 30° से 60° के बीच स्थित रहती है। यह राशि पृथ्वी गुण की प्रधानता, अचर स्वभाव व स्त्रियोचित चरित्र रखती है। इस राशि में स्थित होने पर चद्रमा उच्च का होता है, सूर्य के लिए यह शत्रु स्थान है, बुध व शनि के लिए मित्र स्थान तथा मंगल व बृहस्पति के लिए सम स्थान है कृत्तिका नक्षत्र के द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ चरण, रोहिणी नक्षत्र के चारो चरण तथा मृगशिरा नक्षत्र के प्रथम व द्वितीय चरण वृष राशि के अंतर्गत आते है। इस राशि का स्वामी शुक्र है तथा कोई भी ग्रह वृष मे स्थित होने पर नीच नही होता है। इस राशि का चिह्न वृष (Bull) है। शारीरिक गठन मध्यम ऊँचाई, राशि के स्वामी शुक्र के कारण शरीर भारी, मोटापे की सभावना, चौडे कधे व मजबूत मासपेशियाँ। चेहरा व आँखे सुदर, बडे कान। हठ व घमड सहित महत्त्वाकाक्षा रखनेवाला, परतु साथ ही मित्रो व परिचितो के प्रति प्यार व सहृदयता की प्रवृत्ति। कभी-कभी अपनी बात पर अडियल रहने की प्रवृत्ति।

पृथ्वी के गुण व अचर स्वभाव के कारण इस राशि मे धैर्य की प्रमुखता है तथा परिणाम के तत्काल आशा के बगैर धैर्यपूर्वक कार्य करने की क्षमता है, परंतु यदि इन्हें जानबूझकर उत्तेजित किया जाएगा तो अपने चिह्न वृष के समान प्रतिद्वंद्वी से बदला लेने की भी इच्छा इनमे उत्पन्न हो जाती है। वृष के समान इनकी शारीरिक शक्ति पर्याप्त है। अत भले ही देखने मे इन व्यक्तियों में उतनी शारीरिक शक्ति प्रतीत न हो, परतु इनके शरीर मे गुप्त शारीरिक शक्ति अवश्य होती है। गुप्त शारीरिक शक्ति रोगो
के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी देती है। अत सामान्यतः इन व्यक्तियो का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
शारीरिक सुख की इच्छा रखेगा तथा अच्छे भोजन व मिष्टान्न के प्रति रुचि रखेगा। आर्थिक स्थिति सुधारते रहने, अर्थात् धन कमाने की इच्छा रखेगा। साथ ही अपने सुख के कार्यो के लिए व्यय भी करेगा। यह अपने घर को व्यवस्थित व सुरुचिपूर्ण रखेगा तथा यदि पारिवारिक सदस्य इस कार्य में सहयोग नही करेंगे तो उनसे स्वत सबध मे मधुरता नही रहेगी मित्रो के बीच बातचीत की विशेष रुचि रहेगी। यद्यपि सामान्यत इसका स्वास्थ्य अच्छा रहता है, परंतु यदि यह अस्वस्थ होता है तो टॉन्सिल अथवा गले की अन्य बीमारी की अधिक आशंका रहेगी।
श्वेतः शुक्राधिपो दीर्घः चतुष्पाच्छर्वरीवली।
याम्येट् ग्राभ्यो वणिग् भूमी रजः पृष्ठोदयो वृष:॥ बृहत्पाराशरहोराशास्त्र
वृष राशि का वर्ण सफेद, लम्बा शरीर, चार पैर, रात्रि में बल, याम्य दिशा में निवास, गावों में विचरण, वैश्यजाति, भूमितत्व, रजोगुण, पृष्ठ से उदय तथा स्वामी शुक्र होते हैं॥
